Ishq ka chkkar

इश्क़ एक ग़ुनाह है ,जो हर किसी से हो जाता है। 
ये ग़ुनाह हर कोई करना चाहता है।

माना कि ,ये दिल को दिल से जोड़ता है ,
न जाने -अनजाने ही ,कितने दिलों को तोड़ता है ? 


ये ग़ुनाह ! वो करता नहीं ,हो जाता है। 
ग़ैर को अपना समझ ,जब दिल उससे जोड़ता  है।
 
सबसे बड़ा कुसूर ,तो इस दिल का होता है 
कहीं देखी  नहीं कोई अच्छी सुरत ,ग़ुनाह कर बैठता है।  

आँखे मयख़ाना बन जाती हैं। 
जब उनसे जाम पीकर, एक कुसूर  हो जाता है। 

ये रुलाता है ,रात -दिन बेचैन करता है ,
कुसूर रूह का हो जाता है ,जब रुबायत ए इश्क़ लिखा जाता है।  

इश्क़ वो गुनाह है ,जो वो करे दे ,थोड़ा है। 
इस इश्क़ के चक्कर में ,न जाने कितने गुनाह कर जाता है ? 
  
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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