Didar jaruri hai

मुहब्बत से पहले ,दिल लगाने के बाद ,
 इक बार ,दीदार ए यार जरूरी है। 

चाँद निकलने से पहले ,शाम ढलने के बाद ,

उस हसीन यार का ,दीदार जरूरी है। 

तन्हाइयों के आगोश में, समा जाने से पहले ,
मेरी ख़ुशियों का दीदार ए यार जरूरी है।

ज़ाम में डूबने से पहले ,इश्क़ लड़ाने के बाद ,
उस यार का मेरे पहलू में आना जरूरी है। 

ख़ुशियाँ मेरी ,लूट भी गयीं , तो क्या ?
उसकी मुहब्बत का फ़लसफा भी ज़रूरी  है। 

उसके इश्क़ की गहराई में ,उतरने से बाद......  
इक बार ,धड़कनों का गिनना जरूरी है।

 जिन्दा रहने के लिए साँस जरूरी है। 
 जीवन में ,दीदार ए यार भी जरूरी है।  
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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