अब न रही ,कोई सखी सहेली....
चाय ही, बन गयी अब अपनी सहेली।
नाश्ते में भी........
चाय के बिन काम नहीं चलता।
चाय न मिले तो , दिन नहीं बनता।
मुड़ खराब हो तो.........
ये ही सहारा बन जाती है।
ऐसे में ,ये ही अपनी दोस्त नज़र आती है।
बन रही है ,चाय तो..........
सबका बनता ,एक -एक प्याला है।
गपशप के साथ ,चाय का लुफ़्त निराला है।
सुख हो या दुःख.......
हरदम साथ निभाती है।
ज़रा सी चाहत पर ,मेज पर चाय चली आती है।
गरीब हो या अमीर.......
सभी की दोस्त बन जाती है।
अकेलेपन की भी ,यही हमदम ,साथी है।
मौसम बदला नहीं ,
पकौड़ों संग ,खाने का स्वाद बढ़ाती है।
ठंडक में ये अकेली ही ,गर्माहट दे जाती है।
