उन पलों को कैसे स्मरण करूं ?
कुछ पल खट्टे -मीठे ,
तीखे और कड़वे भी हैं।
न चाहते हुए भी ,आ ही जाती हैं ,
भूली -बिसरी यादें।
आके लिपट जाती हैं , ज़ेहन से ,
कुछ यादें ,सभी ग़म भुला देती हैं।
कुछ पल के लिए ही सही......
मुस्कान ले आती हैं।
कड़वे पल ,दिल को दुखा जाते हैं।
कहाँ हम गलत थे ?एहसास कराते हैं।
कुछ कहते -जो गया सो बीत गया।
बिता पल भी ,किसी भूत की तरह ही
आकर खड़ा हो जाता है।
चाहे, जितना पीछा छुड़ा लो !
एक एहसास दिलाता है ,
मैं भी जीवन का हिस्सा था।
कड़वा हो या मीठा ,मैं भी जीता था।
''भूली -बिसरी यादों ''का इक झोंका था।
