Atut dosti

प्रेम का धागा ,उससे जोड़ा है। 
इक विश्वास उससे बांधा है।  
उसके संग का ,एहसास है। 
हर पल ,वो मुस्कुराता  है। 
निस्वार्थ दोस्ती है ,हमारी। 
जो 'अटूट' रिश्ता निभाता है।
वो ही सच्चा ,मित्र सखा कहलाता है। 


वो निःस्वार्थ निभाता है ,दोस्ती। 
हम सीधी -साधी निभाते हैं ,दोस्ती।
वो दिल से निभाता है ,अपनी दोस्ती   
सही राह दिखाती है ,उसकी दोस्ती।  
मेरी आशा ,उम्मीद है ,उसकी दोस्ती। 
मेरी सोच ,मेरे मन में है ,उसकी दोस्ती। 
 बातें  बड़ी नहीं ,साथ निभाते हैं दोस्ती।
दूनिया के झूठे रिश्तों को छोड़ ,
मैंने तो अब उससे ही कर ली है ,दोस्ती।  
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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