नंदिनी मन ही मन बहुत परेशान थी, दीपक दो दिनों से गया हुआ था या यूँ कहें ,'ग़ायब हो गया था।' बिना कोई जानकारी दिए वो न जाने कहाँ चला गया ? कभी नंदिनी को लगता है' कि वो उसे धोखा दे रहा है।' कभी लगता है ,'उसके जीवन में कुछ तो चल रहा है, जो वो मुझे नहीं बता रहा है।'' उसने ,नंदिनी से कोई वायदा नहीं किया फिर भी नंदिनी उसकी प्रतीक्षा कर रही है। वो स्वयं ही नहीं जानती कि उसे दीपक से प्रेम हो गया है किन्तु इस बात को वह स्वीकारना ही नहीं चाहती। उसके चाहने न चाहने से क्या होता है ? दीपक भी तो उसे एहसास कराये, कि वो भी उससे मुहब्बत करता है।
उधर नंदिनी की मम्मी ने, उसे बुलाया हुआ था ,किन्तु अपने घर जाने से पहले, वो एक बार चाहती थीं ,कि वह दीपक से मिले और उसके मन की बात जान ले किंतु अब ये सब उसके लिए संभव नहीं लग रहा था। पता नहीं, वो न जाने कहां चला गया ? उसकी प्रतीक्षा में ,कभी उसके घर के सामने से गुजरती ,तो कभी छत पर जाकर देखती, फिर निराश हो वापस आकर खिड़की के समीप बैठ जाती।
नानी !से उसकी बेचैनी छिपी नहीं थी ,वो उसे देख रही थीं, और वो समझ भी रही थीं , कि यह ऊपर से मना ही करती रहती है किन्तु अब दीपक के प्रति इसके मन में प्यार की कलियाँ चटकने लगीं हैं। उसे इस तरह हैरान -परेशान देखकर नानी ने , नंदिनी से पूछा- दीपक ,कहां गया है ? क्या तुझे मालूम है ?
मुझे क्या मालूम ,मुझे क्या बताकर गया है ? मैं क्या उसकी कुछ लगती हूं ,झल्लाते हुए नंदिनी बोली।
तुझे तो बहुत ही जल्दी गुस्सा आ जाता है, मैंने ऐसा क्या पूछ लिया ,जो तू, मुझसे इस तरह से बोल रही है ?
नानी के यह कहते ही, नंदिनी को अपनी गलती का एहसास हुआ और अपने मन को शांत करने का प्रयास करते हुए बोली -सॉरी ,नानी ! मेरा मन परेशान था। मैं कुछ और ही सोच रही थी ,इसलिए ऐसा बोल गयी।
क्यों ,तू परेशान क्यों है ? यदि वो ,तुझसे कुछ बताकर नहीं गया, तो हो सकता है ,अपने परिवार में अपने माता-पिता से मिलने गया हो। बुजुर्ग माता-पिता होंगे, बीमार भी हो सकते हैं। किसी भी तरह की परेशानी हो सकती है। क्या बंदा, अब अपने घर भी नहीं जाएगा ?
नहीं ,नानी झेंपते हुए नंदिनी बोली - मैंने ऐसा कब कहा ? कि मैं दीपक के कारण परेशान हूँ ?वो तो मम्मी का फोन आया था और उन्होंने मुझे घर बुलाया है, इसीलिए थोड़ा परेशान थी।
ये बात तू ,मुझे अब बता रही है ,तेरी माँ का फोन कब आया था ?आया भी हो ,तो इसमें परेशानी किस बात की है ? तेरी माँ ने, ही तो बुलाया है ,क्या उसका इतना भी अधिकार नहीं है कि वो अपनी बेटी को मिलने के लिए बुलाये।
नहीं ,नानी !मम्मी ने मुझे मिलने के लिए नहीं बुलाया है बल्कि लड़के वालों से मिलने के लिए बुलाया है।
क्या उन्होंने कोई लड़का देख लिया ? ये तो बड़ी अच्छी बात है ,नानी चश्में में से नंदिनी को देखकर मुस्कुराई और बोलीं -चलो !अच्छा ही हुआ ,ये काम भी हो गया। अब कहीं न कहीं तो, तुझे विवाह करना ही था।
आश्चर्य से नंदिनी ने, नानी से कहा - नानी ! यह बात आप कह रही हैं।
हाँ ,मैं ही कह रही हूँ ,क्या तुझे यहाँ आस -पास कोई और दिखलाई दे रहा है ?
आप तो जानती ही हो और आपने ही तो मुझे, दीपक से मिलने के लिए, उससे बातें करने के लिए कहा था।
हां, कहा था ,किंतु तू ,उससे बात ही नहीं कर पाई, उससे पहले ही कोई रिश्ता आ रहा है ,तो उसे देखने में क्या बुराई है ?हो सकता है ,लड़का दीपक से भी बेहतर हो और अच्छी नौकरी वाला मिल जाए। कहीं तुझे दीपक से प्यार तो नहीं हो गया ?
नहीं ,नानी !आप ये क्या कह रहीं हैं ?
माना कि हम दीपक के विषय में सोच रहे थे। मैंने, तुझे दीपक से बातचीत करने के लिए कहा था ,न कि साथ में घूमने -फिरने के लिए.... तुझे तो मालूम है ,उसने अभी अपना ठीक से परिचय भी नहीं दिया और न ही अपने विषय में ज्यादा कुछ बताया है। अबकी बार आ जाए ,तो उसे घर ले आना। मैं ही ,उससे बात करूंगी।
तुझसे तो कुछ होने वाला नहीं है। किन्तु उसने तो कुछ कहा ही नहीं ,अब भी न जाने कहाँ चला गया ?पड़ोसी होने के नाते कम से कम उसे ,बताकर तो जाना चाहिए ,'कि नानी जी ,मैं दो या चार दिनों के लिए अपने घर जा रहा हूँ ,इस तरह ग़ायब होना तो उचित नहीं हैं ,न....
वही तो... नानी ! एक इंसान हमसे इतनी बातें करता है ,मिलता -जुलता है , मैं क्या उसे रोक लेती ? कहकर तो जा सकता था कि मैं इतने दिनों के लिए बाहर जा रहा हूँ। नानी ने इतनी घुमा -फिरकर बात की और उसे फिर उसी जगह ले आईं ,जिसके कारण नंदिनी को फिर से क्रोध आ गया। अब नानी से भी कहने से कोई लाभ नहीं ।
नानी मुस्कुराते हुए बोलीं - अभी तो तूने कहा -'कि तू उसकी कौन लगती है ? फिर वह किस रिश्ते से, तुझसे कह कर जाता, कि मैं कहां जा रहा हूं ? अच्छा ये बताओ ! तुम्हारी बात कुछ आगे बढ़ी।
तब थोड़ा शांत होकर नंदिनी बोली -नहीं नानी ! मैं ,उससे कुछ पूछ ही नहीं पाई। ऐसा नहीं है कि मैंने प्रयास नहीं किया ,मैंने उससे पूछा भी था, किंतु या तो उन्हें समझ नहीं रहा था या अनजान बनने की कोशिश कर रहा था। तब मैंने स्पष्ट भी पूछा था -'क्या तुम ,मुझसे कुछ कहना चाहते हो , किसी महिला या किसी रिश्ते के विषय में.... किंतु उसने कहा -''कि मैं तुम्हें शाम को लेने आऊंगा और तभी हम दोनों मिलकर बातें करेंगे किंतु वो तो शाम को भी मुझसे मिलने नहीं आया इसीलिए मुझे उस पर गुस्सा था।
हम्म्म उसकी बात सुनकर नानी बोली - इस तरह से अचानक कोई नहीं जाएगा ,अवश्य ही कोई परेशानी आ गई होगी ,नानी शांत स्वर में बोलीं । नानी की बातें सुनकर नंदिनी को भी लगा, कि शायद वो सही कह रहीं हैं। उसे इतना परेशान नहीं होना चाहिए।
तब उसने नानी से ,अपनी मम्मी के फोन के विषय में पूछा - अब बताओ ! नानी क्या मैं घर जाऊं ?
घर जाना चाहिए ,क्यों नहीं जाना है ? वो मेरी बेटी है। उसे ,मैं अच्छे से जानती हूँ ,उसे, तेरी बहुत फ़िक्र होगी ,रातों को नींद नहीं आती होगी और अब यदि तू नहीं गई ,वो मुझे तो चार बात सुनाएगी ही...'मम्मी तुमने मेरी बेटी को बिगाड़ दिया है, मेरी तनिक भी नहीं सुनती '',तू क्यों इस बुढ़ापे में मुझे ,उससे डांट पड़वाना चाहती है ,नानी ने मुँह बनाया।
उनकी बात सुनकर नंदिनी मुस्कुराई ,किन्तु किसी सोच में पड़ गयी।
तब उसकी तरफ देखते हुए नानी बोलीं -रही बात दीपक की ,अभी तेरे जाने में समय है ,हो सकता है ,तब तक वो वापस आ जाये। ठीक है ,जब वो लोग बुला रहे हैं तो तुझे जाना चाहिए। इतने दिनों से परेशान हैं। हो सकता है ,कोई अच्छा लड़का मिल गया हो ,देखने में कोई बुराई नहीं है।
