Rasiya [part 122]

एक दिन के बाद ,उसका फिर से मैसेज आया, जानने न जानने से क्या फर्क पड़ता है ? मैंने  तुम्हारी तस्वीर देखी है ,आज भी तुम, बहुत सुंदर  लगती हो।

आज भी से क्या मतलब ? क्या, तुमने, मुझे पहले भी देखा है  ?

हाँ ,हमारा बरसों पुराना रिश्ता है। 

देखो ! कहीं पिछले जन्म का तो नहीं 😂😂😂


इस बात से  क्या फ़र्क पड़ता है ? हो सकता है ,जन्मों का रिश्ता हो और तुम मुझे पहचान नहीं पा रही हो। 

तुम तो बातें तो ऐसी कर रहे हो ,जैसे मुझे पहले से जानते हो।

ख़ैर अब तुमसे बातें हो ही रही हैं ,तो अब जान भी लेंगे। जानते भी होते, तो क्या हो जाता ? हम पहले भी तुम्हें पसंद करते थे और अभी भी कर रहे हैं। 

ओय !तुम जो भी हो मेरे पति को पता चल गया,न...  तो तुम्हें छोड़ेंगे नहीं .....

मैं कब चाहता हूँ ? तुम मुझे छोडो ! मुझे अपना ही समझो !

अपना क्या ? मैं अपने पति की बात कर रही हूँ ,तुम ये बात' कान खोलकर सुन लो !'मैं शादीशुदा हूँ। 

मुझे इस बात से कोई आपत्ति नहीं है , दोस्ती तो हम कर ही सकते हैं। 

उर्वशी ने मन ही मन सोचा ,बड़ा ही चिपकू आदमी है ,मुझे इसे ब्लॉक कर देना चाहिए किन्तु इसकी बातों से तो लगता है ,ये मुझे पहले से जानता है अगर इसे ब्लॉक कर देती हूँ।

न..न.. ऐसा सोचना भी मत...  तुम मुझे ब्लॉक करने का सोच रही हो ?है न... 

तुम्हें कैसे मालूम ?

तुमने जबाब देने में इतनी देर जो कर दी ,तुम जानती हो ,'मुझे देरी पसंद नहीं। '

जब मैं, तुम्हें जानती ही नहीं ,तब मुझे कैसे पता चलेगा ? कि तुम्हें क्या पसंद है ,क्या नहीं ?

जानती तो हो, किन्तु तुम्हारी स्मृतियाँ  धुंधली पड़ गयी हैं ,तुम्हारी उम्र भी तो हो चुकी है ,😃😃😃😃 

तुम्हारा कहना है ,मैं बूढ़ी हो गयी हूँ। 

ये मैंने नहीं कहा ,तुम ही कह रही हो 😂😂😂😂

तुम मुझ पर हंस क्यों रहे हो ?यदि मेरी उम्र बढ़ी है और मैं तुम्हें जानती हूँ ,तो तुम भी कोई बच्चे नहीं हो। अब तक बूढ़े हो गए होंगे। 😡😡😡

नहीं ,हम तो अभी भी ज़िंदादिल और जवान हैं ,किन्तु मुझे लगता है ,तुम इतना गुस्सा करोगी तो अवश्य ही बूढी हो जाओगी 😁😁😁

उसकी बात से उर्वशी ने अपने गुस्से को नियंत्रित किया ,ये सही तो कह रहा है ,ये मस्ती कर रहा है और मैं गुस्सा कर रही हूँ। मैं क्यों अपना ख़ून जला रही हूँ ? मैं भी तो देखूं ,ये कितना जवान है ? ये भी तो पता लगाना है आख़िर उर्वशी से पंगा लेने की ज़ुर्रत किसने की ? 

कैसे पता चलेगा ?आखिर ये कौन है ? क्या कोई जानबूझकर मज़ाक कर रहा है। उसका  दिमाग़ इधर -उधर दोस्तों में ,रिश्तेदारों में दौड़ रहा था किन्तु समझ नहीं आ रहा था ,ये कौन हो सकता है ? ब्लॉक करते -करते रुक गयी। मैं क्या इससे डरती हूँ ?बाल -बच्चेदार महिला हूँ ,मुझसे कोई छिछोरी हरक़त करेगा तो छोडूंगी नहीं ..... 

 तुमने अपना नाम और अपनी तस्वीर क्यों छुपा रखी है ? तुम्हारे मन में क्या है ?यदि तुम गलत नहीं हो तो अपनी प्रोफाइल को क्यों लॉक किए हो ?

 उधर से कोई जबाब नहीं आया। उर्वशी ने सोचा, शायद चला गया। उसे गुस्सा भी आया और सोचने लगी, कैसा इंसान है ? बेमतलब ही चिपकने की कोशिश कर रहा है। अपने को बता रहा है ,वो मुझे जानता है फिर से उसके दिमाग़ में वही घूमने लगा ये इंसान आख़िर कौन हो सकता है ?उर्वशी फिर घर के कामों में व्यस्त हो गयी। शाम को थोड़ा आराम करने बैठी ,उसके हाथ में फिर से फोन आ ही गया। 

 मेसेंजर से फिर से उसके बहुत से संदेश आने लगे ,जब उसने जानना चाहा तो उस अनजान शख़्स का था।'' गुड इवनिंग ''जी कैसी हो ? सॉरी -सॉरी मैं आपके सवाल का जबाब नहीं दे पाया। दरअसल मेरे मित्र आ गए थे। मैंने सोचा तुम नाराज़ होंगी। 

मुझे सफाई क्यों दे रहे हो ? मैंने तुमसे कोई शिकायत थोड़े ही की। नाराज़ होने का मेरा कोई हक़ भी नहीं बनता । 

 दोस्त होने के नाते तुम्हारा हक़ तो बनता है।

आख़िर तुम्हारे मन में क्या है ? तुम,मुझे जानते हो किन्तु अपना परिचय नहीं दोगे। 

 मन में क्या हो सकता है ? मन  का कहा, कभी पूरा नहीं होता , हाँ, यदि पूछ ही रही हो तो बता देता हूँ , बस तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ । 

वो फिर से वही राग अलापने लगा।

 मैं, भला तुमसे दोस्ती क्यों करूंगी ? जब मैं तुम्हें जानती ही नहीं, तुम्हारे मन में कोई चोर नहीं है, तो फिर अपना चेहरा क्यों छुपाया हुआ है ? अपना नाम ही बता दो!

क्या नाम बता देने से, तुम्हारी सभी समस्या हल हो जाएंगी ? क्या तुम मुझसे दोस्ती कर लोगी ?

देखूंगी। 

तब भी देखना पड़े ,तो फिर नाम बताने से क्या लाभ ?

फिर तो इसी तरह रोज़ चैट कर लिया करेंगे !

ओ.... हैलो ! मैं भला तुमसे चैट क्यों करने लगी ?

चैट करोगी, तभी तो हम एक दूसरे के विषय में जानेंगे वरना कैसे जान पाएंगे ?

मुझे, तुम्हें जानना क्यों है ? मुझे, तुम्हें जानने में कोई रूचि नहीं है। 

नहीं है ,तो हो जाएगी ,जब दो अजनबी बात करते हैं, तब वो एक -दूसरे के विषय में कुछ नहीं जानते किन्तु जब बातचीत करते हैं तो जानने लगते हैं। वैसे तुम्हारा कोई और भी दोस्त है। 

मैं, तुम्हें क्यों बताऊँ ?मेरे कितने दोस्त हैं ,कितने नहीं ?

जहाँ तक मेरा विचार है ,तुम्हारे कम ही दोस्त होंगे, किन्तु अब एक बढ़ गया है। 

तुम्हें कैसे मालूम ?एक कौन बढ़ा ?

मैं '

ये तुमसे, किसने कहा ?कि तुम मेरे दोस्त हो ,अब तो उर्वशी को उस अनजान शख़्स से चैट करने में मज़ा आने लगा। जिसका मैं नाम तक नहीं जानती वो मेरा दोस्त कैसे हो सकता है ?

नाम में क्या रक्खा है ?जब तुम इतना पूछ ही रही हो। अब बता ही देते हैं -सी. ,बी. एच.

ये क्या नाम हुआ ? सी.बी.एच. ! 

अपना पूरा नाम बताइये !

मुझे तो लोग इसी नाम से जानते हैं। 

तब उर्वशी को एक उपाय सूझा और उससे पूछा - सी.,बी.एच. जी आप क्या काम करते हैं ?

अब हम क्या काम करेंगे ?मस्त इंसान हैं ,काम बहुत हो गया ,अब तो तुम्हारी यादों में ही खोये रहने का दिल करता है। 

क्या खाते -पीते नहीं हो ? अच्छा बताओ ! तुम्हारी पत्नी कैसी है ? क्या वो तुम्हेंदेखती नहीं है ,तुम सारा दिन खाली बैठे,रहते हो और लड़कियों को ताड़ते रहते हो।क्या  वो ये सब नहीं जानती है ?

उसे मालूम है ,मेरा पति कहां जाएगा ? यहीं तो है, मैं लड़कियों को कैसे ताड सकता हूँ  ?चैट करता हूँ, वो भी उनसे जो दिल के अच्छे होते हैं। तभी उर्वशी के पति आये और पूछा -क्या कर रही हो ?

कुछ नहीं ,उर्वशी ने तुरंत ही अपना फोन बंद किया अपने पति के लिए पानी लेने चली गयी और आकर पूछा -चाय भी ले आऊं। 

नहीं ,इच्छा नहीं है ,भोजन ही करूंगा। कहकर टेलीविजन का रिमोट लेकर मैच देखने बैठ गया।

वो खाना तो बना रही थी किन्तु उसके विषय में सोच रही थी आख़िर ये कौन हो सकता है ?  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post