Mysterious nights [part 180]

हवेली की शुद्धि के लिए महात्मा हवेली में आते हैं और रूही से पूछते हैं ,उसने अपराधियों को दंड देकर उचित किया किन्तु क्या वो संतुष्ट है ?उसे शांति मिली है किन्तु रूही कुछ भी स्पष्ट उत्तर न दे सकी। 

तब वो पूछते हैं  - अब तुमने क्या निर्णय लिया? जो अब वर्तमान में चल रहा है, उसे ऐसे ही रहने देना है ,या फिर नष्ट करना चाहती हो ? रूही  शांत थी ,वो जानते थे ,ये लड़की आपराधिक प्रवृत्ति की नहीं है किन्तु इसके साथ अनुचित तो हुआ है।


'' कई बार जीवन में ऐसी घटनाएं हो जाती हैं ,जिनके कारण इंसान न चाहते हुए भी वो कार्य करने पर विवश हो जाता है जो उसने सोचा भी नहीं होता ''इसीलिए रूही भी असमंजस की स्थिति में है। 

तब वो बोले - मैं जानता हूँ ,तुम अपने अपराधियों को दंड देना चाहती हो , सब तहस-नहस करना चाहती हो ? प्रकृति किसी को नहीं छोड़ती ,वो स्वयं बदला लेती है ,उस विश्वास को क्यों नष्ट कर देना चाहती हो ? तुम्हारा फिर से एक अंधकारमय जीवन बन जाएगा।

 हो सकता है, तुम इन हत्याओं के तहत जेल चली जाओ ! बाकी का जीवन तुम इस हवेली में नहीं बल्कि जेल में बिताओ ! तब क्या इन्हें अपनी गलती का आभास होगा ? बल्कि ये लोग तुम्हें अपने पुत्रों का अपराधी समझ तुमसे घृणा करेंगे। कार्य वो करो ! जिससे इन्हें अपनी गलती का एहसास हो ,बल्कि तुमसे घृणा करने के बदले ,ये अपने को तुम्हारा अपराधी समझें और शर्म से इनकी नज़रें झुक जाएँ। तुमने, अब तक जो भी कष्ट सहे ,अब ये बचा हुआ जीवन , तुम्हें नई राह  दिखाना चाहता  है। तुम जीवन को आनंद से क्यों नहीं जीना चाहती ? क्यों' बदले की अग्नि 'में जलते रहना चाहती हो। 

तुम्हारे अंदर लालच नहीं है, अब से पहले बदले की कोईं भावना भी नहीं थी , उसे जबरन ही जागृत किया गया था। 

 गुरूजी !मैं अपने अपराधी के साथ वैवाहिक जीवन कैसे व्यतीत कर सकती हूं ? मैं जब भी, उसके साथ होती हूं तभी मुझे उसका वह रूप नजर आता है। 

''क्षमा करना, इतना आसान नहीं है , जितना की दंड देना है'' ,हम आसानी से दंड दे सकते हैं, किसी को भी आसानी से मार सकते हैं किंतु उसको जिंदा रहने की सजा देना भी, किसी दंड से कम नहीं है जबकि उसे मालूम हो ,उसका अपराध क्या है ?

 इस हवेली के लोगों से अपराध हुआ है और इसमें दमयंती  का भी हाथ है ,उनकी सास की आत्मा को अभी शांति नहीं मिली है। आज उसी का हवन होगा और उसी हवन में अपने मन की  कड़वाहट ,घृणा सभी विचार नष्ट कर देना, हवन की पवित्र अग्नि, सब गलतियों को, अपराधों को भस्म कर देगी।

 तब मन  को शांत करके, अपने नवजीवन में प्रवेश करो ! समय की प्रतीक्षा करो ! अपराधियों को उसके किए का दंड अवश्य मिलता है, थोड़ी प्रतीक्षा करनी होगी। तुम्हारी बहन इस हवेली में प्रवेश करती है उसके मन में सद्भावना तो नहीं है लेकिन'' होनी को कौन टाल सकता है ''? जो होना है ,वह तो होकर ही रहेगा। उसे हवेली में आने से नहीं रोक सकता, तुम्हारा संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है , हो सकता है, तुम्हारा संघर्ष बढ़ जाए और यह भी हो सकता है, समाप्त ही हो जाए। यह तो समय बताएगा। 

तब गुरु जी कोई उपाय तो बताइए जिससे मन में शांति रहे, मन में इतनी उथल-पुथल मची है, कुछ समझ नहीं आ रहा मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं ?

समय की प्रतीक्षा करो ! राह स्वतः ही निकलती चली जाएगी। तभी बाहर से आवाज आती है ,गुरुजी ! सारा प्रबंध हो गया। 

अभी मैं चलता हूं, मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है कभी भी मेरी आवश्यकता पड़े तो तुम, मुझसे मिलने आ सकती हो, वही करो ! जो तुम्हारा मन कहता है ,जिससे तुम्हें प्रसन्नता मिलती है। कहकर गुरुजी बाहर चले गए। 

 गुरु जी, किस बात का इशारा करके गए हैं ? रूही समझ नहीं पा रही थी मुझे समय की प्रतीक्षा करनी होगी ,क्या मेरा संघर्ष अभी भी जारी रहेगा। जो भी होगा देखा जाएगा यह सोचकर वह भी हवन में सम्मिलित होने के लिए बैठ जाती है। हवन होने के पश्चात गुरु जी ने सभी को आशीर्वाद दिया और दमयंती से कहा -तुम्हारी बहू बड़ी गुणी है, कभी-कभी हमें जो चीजें सामने दिखती हैं अथवा हमारे पास होती हैं।  हम उसकी कदर नहीं कर पाते , इसलिए जो अपने सामने है, उसके मूल्य को पहचानो ! अब तुम लोग बंधन से मुक्त हो चुके हो ,इसलिए आगे जो भी करना है, बहुत सोच समझकर करना ,तुम्हारी सास सुनयना देवी को भी, मुक्ति मिल चुकी है ,वो भी इस बंधन के साथ बंधी हुई थी। 

गुरु जी के चले जाने के पश्चात, हवेली में एकदम शांति छा गई शायद उनके कहे शब्दों का, हवन के मंत्रों का असर था अभी तक किसी के मन में कोई अनुचित विचार नहीं था। न ही कोई  नकारात्मकता थी वरन ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई भारी बोझ उतरा हो।  अपनों के जाने का थोड़ा दुख अवश्य था। 

एक महीने के पश्चात, जब सभी भाई -बंधुओं को विदा कर दिया गया।  तब दमयंती ने अपने बच्चों से कहा -अब किसी भी प्रकार का कोई बंधन नहीं है, तुम अपना दांपत्य जीवन, आरंभ कर सकते हो ,मैं जानती हूं, मेरा बेटा तेजस और गौरव वापस आएंगे। 

उनके इतना कहते ही , रूही को न जाने क्या हुआ ? अचानक बड़ा क्रोध आया और अपने कमरे में चली गई और मन ही मन उसने  निश्चय कर लिया था ,वह संपूर्ण सच्चाई, गर्वित को बताकर रहेगी। गर्वित का भी न जाने क्यों ?आगे बढ़ने का मन नहीं करता था रूही से मिलते समय न जाने क्यों ?उसे डर महसूस होता। उसे लगता, शायद फिर से शिखा हम दोनों के बीच आ जाएगी। 

आज अचानक ही सुमित ने सभी घरवालों का इकट्ठा किया और उन्हें बताया -अब हमारे घर में ऐसा कोई भी बंधन नहीं रह गया है ,अब मैं चाहता हूँ ,कि मेरा विवाह भी हो जाये। 

उसकी बातें सुनकर सभी को आश्चर्य हुआ ,आज तक घर में किसी भी बच्चे ने अपने विवाह के लिए ऐसा नहीं बोला था। 

तब दमयंती जी बोलीं -हमें इस बात की प्रसन्नता है तुम लोग इस बंधन से मुक्त हो किन्तु अभी भी हमारे परिवार को कोई अपनी लड़की देना नहीं चाहता। ठाकुर ख़ानदान जितना अमीर है ,उतना ही अपने कर्मों के लिए भी जाना जाता है। हमें, अपनी लड़की कौन देगा ?

कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है ,न ही कोई लड़की ढूंढने की आवश्यकता है ,रूही भाभी की बहन पार्वती मुझे वो अच्छी लगती है ,वो भी मुझे पसंद करती है। 

क्या ??सभी के आश्चर्य से मुँह खुले के खुले रह गए ,क्या डॉक्टर साहब की दूसरी बेटी !

वो डॉक्टर साहब की बेटी नहीं है ,किन्तु वो, उसे अपनी बेटी की तरह ही मानते हैं। प्रसन्न होकर सभी बड़ों ने सुमित को पार्वती से विवाह की इज़ाजत दे दी ! 

रूही चाहती थी ,कि एक बार वो सभी को पार्वती की सच्चाई बता दे ! उन्होंने एक बार भी रूही से नहीं पूछा कि वो क्या चाहती है ?क्या वो इस रिश्ते से खुश है ? किन्तु अभी भी शायद वो लोग सुधरे नहीं थे। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post