Chaht ka dard

तेरी चाहत का दर्द , किस क़दर मुझे पीना पड़ा, तुम क्या जानो ?

लगता है ,तू करीब है मेरे ,पास नहीं, 

दूर होने का दर्द , तुम क्या जानो ?


ख़्वाब दीखते हैं तेरे ,मेरे ख्वाबों की मल्लिका हो ,

 इस ग़रीब दास का 'इश्क़  'तुम क्या जानो ?

तड़पता हूँ रात -दिन ,तेरी इक झलक पाने के लिए ,

मेरी वो तड़पन ,मेरा दर्द ,तुम क्या जानो ?

दिल में दर्द लिए जीता हूँ ,तुझे अपनी चाहत का पैग़ाम देने को ,

उस चाहत का ''मौल ''तुम क्या जानो ?

बेपरवाह सा ,मैं ज़िंदगी जी रहा था ,न जाने कब से परवाह करने लगा ?

इंतजार में हूँ , मैं  तुम्हारे ,ये तुम क्या जानो ?

 ख़्याल तेरा आता है , इक खुशबु का झोंका बनकर ,

जी लेते हैं ,तेरे ख्यालों में ही , ऐसी ' दर्द -ए -मोहब्बत 'तुम क्या जानो ?

इल्ज़ाम हजारों हैं ,हम पर ,हम ज़िंदगी से बेख़बर ,तेरी चाहत को जी रहे हैं ,

इश्क़ का ऐसा सुरूर  ,तिल -तिलकर जी रहे हैं ,तुम क्या जानो ?




laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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