तेरी चाहत का दर्द , किस क़दर मुझे पीना पड़ा, तुम क्या जानो ?
लगता है ,तू करीब है मेरे ,पास नहीं,
दूर होने का दर्द , तुम क्या जानो ?
ख़्वाब दीखते हैं तेरे ,मेरे ख्वाबों की मल्लिका हो ,
इस ग़रीब दास का 'इश्क़ 'तुम क्या जानो ?
तड़पता हूँ रात -दिन ,तेरी इक झलक पाने के लिए ,
मेरी वो तड़पन ,मेरा दर्द ,तुम क्या जानो ?
दिल में दर्द लिए जीता हूँ ,तुझे अपनी चाहत का पैग़ाम देने को ,
उस चाहत का ''मौल ''तुम क्या जानो ?
बेपरवाह सा ,मैं ज़िंदगी जी रहा था ,न जाने कब से परवाह करने लगा ?
इंतजार में हूँ , मैं तुम्हारे ,ये तुम क्या जानो ?
ख़्याल तेरा आता है , इक खुशबु का झोंका बनकर ,
जी लेते हैं ,तेरे ख्यालों में ही , ऐसी ' दर्द -ए -मोहब्बत 'तुम क्या जानो ?
इल्ज़ाम हजारों हैं ,हम पर ,हम ज़िंदगी से बेख़बर ,तेरी चाहत को जी रहे हैं ,
इश्क़ का ऐसा सुरूर ,तिल -तिलकर जी रहे हैं ,तुम क्या जानो ?
