Shaitani sa......14

 अगले दिन केतकी फिर से अपने खेतों में व्यस्त थी, तभी वह लड़का फिर से उसके करीब आया और बोला - ए ...तुम, कौन हो ?

तुम्हें ,इससे क्या ? तुम कल केशव जी के  घर का पता पूछ रहे थे ,क्या उनसे मुलाकात हो गई ?

नहीं ,मुलाक़ात तो नहीं हुई ,हिचकिचाते हुए बोला। 

ये बात तो केतकी भी जानती थी ,तब उसने पूछा -क्या उनसे मिले नहीं, या उनसे मिलने ही नहीं गए। 

मुझे ,उनसे नहीं मिलना था ,उसने स्पष्ट किया। 



तो फिर किससे मिलने आए थे ? 

यहां एक खूबसूरत सी लड़की रहती है,उसने मन ही मन सोचा ,तब बोला - वो तो मैं इसीलिए पूछ रहा था क्योंकि इस गांव में ,मैं, उन्हीं का नाम जानता हूँ। 

क्या बेमतलब ही इस गांव में आये हो, या फिर तुम्हारा कोई रिश्तेदार भी यहां रहता है ?

हाँ ,यहाँ कोई तो है ,जिसके लिए यहाँ आया हूँ,कहते हुए मुस्कुराया। 

कौन है ? वो ! क्या किसी लड़की का मामला है ?केतकी ने उसकी तरफ देखा। उसने हाँ में गर्दन हिलाई क्या तुम उसे जानते हो ? उसका नाम क्या है ? केतकी ने पूछा। 

उसका नाम तो नहीं मालूम है ,शक्ल देख लूंगा ,तो पहचान जाऊंगा। वैसे उसके पिता का नाम 'केशवदास' ही है। 

जाओ ! उसे ढूंढों ! यहाँ मेरा समय क्यों बर्बाद कर रहे हो ?केतकी लापरवाही से बोली। 

मैं सोच रहा था ,तुम भी एक लड़की हो और खेतों में काम करती हो ,अपने गांव में तो तुम सबको जानती ही होंगी। 

ये क्या बात हुई ?मैं खेत में काम करती हूँ ,तो क्या ?पूरे गांव की ख़बर रखती हूँ ? तुम उसका नाम बता दो !तो शायद मैं सोचूं ,वो लड़की कौन है ?

उसका नाम ही तो नहीं जानता,उसके पिता का नाम तो बता दिया ,उसके भाई का विवाह हमारे गांव की लड़की से हुआ था। 

मन ही मन केतकी ये सोचकर प्रसन्न हुई ,ये मेरे लिए ही, इस गांव में आया है। तब बोली -अच्छा.... तो तुम वही मजनू हो ,जिसे गांव की लड़कियां बता रहीं थीं ,एक लड़का 'केतकी' के पीछे पड़ा था। 

अच्छा ,वो मन ही मन मुस्कुराया और सोचने लगा ,चलो ! इससे बातों ही बातों में ये तो पता चल गया। उस लड़की का नाम 'केतकी' है ,अपनी अक्लमंदी पर मन ही मन प्रसन्न था किन्तु वो ये नहीं जानता ,कि केतकी ने जानबूझकर उसे ,अपना नाम बताया है। 

तब उसने पूछा  -अच्छा...तो तुम, उससे क्यों मिलना चाहते हो ?

बस !है कोई बात !यदि तुम ,मुझे उससे मिलवा दोगी, तो तुम्हारी बड़ी मेहरबानी होगी। 

तुम्हें ,उससे क्यों मिलना है ? और  वो भला तुमसे क्यों मिलेगी ? 

क्या, वो भी तुम्हें जानती है ?

हाँ ,उसने मुझे अच्छे से देखा है ,तुम उससे बस इतना कह देना -''खोड़ा गांव का श्याम मुझे मिला था और वो तुमसे मिलना चाहता है।'' 

न बाबा ,न मैं इन झमेलों में नहीं पड़ती ,तुमने मुझे ये भी नहीं बताया 'तुम उससे क्यों मिलना चाहते हो ?'

वैसे ही.... 

अरे ! चल... ये क्या जबाब हुआ ? तू क्या समझता है ? किसी भी गांव का लड़का आकर मुझसे कहेगा -मुझे ऐसे ही किसी लड़की से मिलवा दो !और मैं मिलवा दूंगी। मैंने यहाँ की लड़कियों को इस तरह किसी से भी मिलवाने का ठेका ले रक्खा है ? तू इन गांव वालों को जानता नहीं है ,काटकर रख देंगे ,ये लोग ,जितने सीधे दिखते हैं ,उतने कटटर भी हैं। यहां ये सब नहीं चलता ,जा !अपने गांव वापस चला जा ! तू उसके भाइयों को नहीं जानता है ,उसके तीन भाई हैं ,तेरी लाश का पता भी नहीं चलेगा। 

लड़के को लगा ,शायद मैंने कुछ गलत कह दिया ,तब उसकी ख़ुशामद करते हुए बोला -देखो !तुम ,मुझे गलत समझ रही हो ,मैं एक पढ़ा -लिखा लड़का हूँ ,मैंने स्नातक कर लिया है ,नौकरी की तलाश में हूँ। मुझे वो लड़की अच्छी लगी ,तो सोचा उसके मन की बात भी जान लूँ ,क्या वो भी मुझे पसंद करती है या नहीं ?

केतकी मन ही मन मुस्कुराई और बोली -देख !कोई गांववाला  आ रहा है ,तुझे ऐसे खड़ा देखकर गलत न समझ ले ,तू जा ! मैं, उससे पूछ लूंगी ,यदि उसे, तुझसे मिलना होगा तो शाम के चार बजे हरिया की ट्यूबवैल पर आ जाना। अब तू जा !

कहते हुए ,केतकी अपने खेतों में बीज बिखेरने लगी। तभी वो आदमी उसके करीब आया ,केतकी बोली -चच्चा !राम !राम !

राम !राम ! लाली वो कोण था ,क्या कह रहा था ?

चाचा ! कुछ नहीं कह रहा था। वो तो किसी के घर का पता पूछ रहा था। 

बस इतनी सी बात थी। 

हाँ ,चाचा ये ही बात थी। 

मैंने सोचा ,ये इतनी देर से खड़ा ,कभी हमारे गांव में आकर  तुझे तंग तो नहीं कर रहा। 

न चाचा ,थारे रहते ,भला मुझे कोई कुछ कह सके। मैं इतनी कमज़ोर नहीं ,जो कुछ भी कहे। 

वो तो हम जाणे हैं ,तू दुर्गा है। आज तेरा बाप कहाँ है ?काम प...तू अकेली लग रही है। ये बात तो है ,तेरे रहते अब उसे किसी बात की फ़िक्र नहीं। 

पापा ! तो आज खाद लेने शहर गए हैं ,मुझे भी ज्यादा काम नहीं है ,बस ये खूड़ और करनी है। मैं भी चली जाउंगी। 

श्याम !हरिया की ट्यूबवैल ढूंढ़ रहा था ,उसके दोस्त ने बताया था ,तब वो शाम को उसी के इर्द -गिर्द मंडराने लगा। बार -बार उस पगडंडी को देखता ,शायद किधर से तो केतकी उसे आती दिख जाये। 

तभी ट्यूबवैल के पीछे की दिवार से बाहर निकलकर एक लड़की श्याम के सामने आकर खड़ी हो गई और बोली -तुम ,मुझसे क्यों मिलना चाहते हो ?

तुम !अचानक कहाँ से आ गयीं ,श्याम को आश्चर्य हुआ। 

ये मेरा गांव है ,मुझे पता है ,कब, कैसे ,कहाँ जाना है ?

उसकी आवाज़ सुनकर श्याम को लगा ,जो लड़की खेत में काम कर रही थी ,उससे ,इसकी आवाज मिलती -जुलती है। तब उसने पूछा - वो लड़की जो खेतों में काम करती है ,क्या तुम्हें उसने भेजा है ?

हाँ ,उसने ही तो बताया- कि तुम, मुझसे मिलना चाहते हो। 

क्या वो तुम्हारी सहेली है ?

हाँ ,अब ये बातें छोड़ो !ये बताओ ! मुझसे क्यों मिलना चाहते थे ? उसकी बातों को सुनकर केतकी समझ गई थी ,वह यहां उसी के लिए आया है। मन ही मन मुस्कुराई ,अब उससे बातें करने में मजा आ रहा था। तब उसने पूछा -तुम इस गांव में किसके यहाँ ठहरे हो ?

हां, मेरा एक मित्र यहां रहता है, मैं उसी के यहां ठहरा हुआ हूं। 

तुम क्या करते हो ? अभी मैं पढ़ रहा हूं।

तुम, मुझसे क्यों मिलना चाहते थे ?कुछ देर वो शांत बैठा रहा ,तब केतकी ने फिर से पूछा - तुमने मेरी बात का जबाब नहीं दिया। 

तुम इतनी नादाँ भी नहीं हो कि समझ न सको !

मुझे क्या समझना है ?

कुछ नहीं ,वो...तुम्हें, मैंने तुम्हारे भाई के विवाह में देखा था,इससे पहले कि वो अपनी बात पूरी करता.... 

तो... भाई के विवाह में तुमने ,मुझे ही देखा था ,वहां और भी तो लड़कियां थीं ,तुम्हें ,मुझसे ही क्यों मिलना है  ?


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post