Dil ki dhadkan

मैं शब्द ,तुम उन शब्दों की' गहराई' हो। 

मैं कविता , तुम उनका 'अलंकार' हो। 

मैं भाव ,तुम उन भावों की 'ऊंचाई 'हो। 

मैं दिल ,तुम उस दिल की 'धड़कन' हो।


मैं 'धड़कन' ,तुम उनकी 'सरगम 'हो। 

मैं एक शरीर ,तुम उस की ' रूह ' हो।

मैं प्रेम ,तुम उस प्रेम की 'मिठास 'हो। 

मैं इंतजार , तुम उसकी 'परीक्षा ' हो। 

मैं ''शिवालय' ,तुम उसकी' देवी' हो।

मुझसे हो शुरुआत ,और अंत तुम हो।

मैं ''कूंची '' तुम मेरे' जीवन के रंग' हो। 

मैं ''कलम ',तुम उसकी तेज 'धार' हो।  

मैं ''धैर्य '',तुम मेरा 'विश्वास ' हो। 

मैं ,''तुम ''दोनों मिले तो 'हम हों। 

मैं 'पुजारी ', तुम मेरी 'पूजा 'हो।

मैं मुक्ता ',तुम उसकी माला हो।  

फिर से वही बात ,मैं दिल तुम धड़कन हो। 

 

 

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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