मैं शब्द ,तुम उन शब्दों की' गहराई' हो।
मैं कविता , तुम उनका 'अलंकार' हो।
मैं भाव ,तुम उन भावों की 'ऊंचाई 'हो।
मैं दिल ,तुम उस दिल की 'धड़कन' हो।
मैं 'धड़कन' ,तुम उनकी 'सरगम 'हो।
मैं एक शरीर ,तुम उस की ' रूह ' हो।
मैं प्रेम ,तुम उस प्रेम की 'मिठास 'हो।
मैं इंतजार , तुम उसकी 'परीक्षा ' हो।
मैं ''शिवालय' ,तुम उसकी' देवी' हो।
मुझसे हो शुरुआत ,और अंत तुम हो।
मैं ''कूंची '' तुम मेरे' जीवन के रंग' हो।
मैं ''कलम ',तुम उसकी तेज 'धार' हो।
मैं ''धैर्य '',तुम मेरा 'विश्वास ' हो।
मैं ,''तुम ''दोनों मिले तो 'हम हों।
मैं 'पुजारी ', तुम मेरी 'पूजा 'हो।
मैं मुक्ता ',तुम उसकी माला हो।
फिर से वही बात ,मैं दिल तुम धड़कन हो।
