Kahani teri meri

जब कहानी लिखनी है तो कहानी  ही लिखूंगी ,कोई कविता या शायरी तो नहीं ,तो लीजिये ,कहानी प्रस्तुत है -

तेरा -मेरा मिलना ,संयोग तो नहीं ,कुदरत का ही इशारा था।

 जब मिले' हम दोनों 'मैं भी' कुंवारी' थी ,तू भी' कुंवारा 'था। 

तेरा -मेरा मिलन गाड़ी के दो पहिये ,जैसा मिलन हमारा था। 

एक तेज दौड़ता दूर जाता था ,दूजा तालमेल बिठाता था। 

कभी हिस्से में दर्द आया ,कभी मिला सुख का साया था। 



सुख आता ,पल भर को ,चला जाता ,ग़म तो साथ निभाता था। 

सुख -दुःख ,की आंधी -बारिश ,धूप -छाँव में' हम 'साथ निभाते थे। 

कुछ भी रहा ,आया -गया ,लड़ते -झगड़ते फिर भी साथ ही रहते थे। 

वक्त के साथ ,हम भी चलते रहे ,वो नहीं ठहरा ,हम भी नहीं ,

थपेड़ो को झेला ,आगे बढ़ते गए , मन में अब कोई आस नहीं। 

ठहर कर देखती हूँ ,कुछ 'अधूरे  'तुम थे ,कुछ 'अधूरे ' मैं थी। 

कुछ कमी तुझमें थी ,कुछ मुझमें थी ,दोनों मिले तू और मैं 'तुम' हो गए। 

अपूर्ण थे ,पूर्ण हो गए ,कहानी तेरी -मेरी ,अब'' हमारी'' हो गयी।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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