Kadi tapsya

 साधु -सन्यासी करते, कितनी कठिन तपस्या ?

दूर होती थी ,सेवा -भाव से ,उनकी सभी समस्या।

आज के युग में ,जीवन जीना ही है ,कठिन बहुत। 

मानव  जीवन में ,आज भी बनी हैं ,अनेक समस्या।

दूषित पर्यावरण में ,जीवन जीना है कठिन तपस्या।

शिक्षा  क्षेत्र में ,आगे बढ़ना भी है ,एक बड़ी समस्या। 

लग्न और मेहनत से.......  ,


अपनी मंजिल को पाना ही है ,कड़ी तपस्या। 

मंजिल आध्यत्मिक हो या सामाजिक ,

उसमें आगे -आगे बढ़ते जाना..... 

और मंजिल पाना भी है, एक ''कड़ी तपस्या।'' 

भटकाव बहुत हैं ,इस जीवन के ,सही राह पाना ,

उस पर चलते जाना ,ही है ,''कड़ी तपस्या''।

कंदराओं और हिमाचल में रहना ही नहीं ,

इक सच्चा जीवन जीना भी है ,''कड़ी तपस्या । ''    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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