साधु -सन्यासी करते, कितनी कठिन तपस्या ?
दूर होती थी ,सेवा -भाव से ,उनकी सभी समस्या।
आज के युग में ,जीवन जीना ही है ,कठिन बहुत।
मानव जीवन में ,आज भी बनी हैं ,अनेक समस्या।
दूषित पर्यावरण में ,जीवन जीना है कठिन तपस्या।
शिक्षा क्षेत्र में ,आगे बढ़ना भी है ,एक बड़ी समस्या।
लग्न और मेहनत से....... ,
अपनी मंजिल को पाना ही है ,कड़ी तपस्या।
मंजिल आध्यत्मिक हो या सामाजिक ,
उसमें आगे -आगे बढ़ते जाना.....
और मंजिल पाना भी है, एक ''कड़ी तपस्या।''
भटकाव बहुत हैं ,इस जीवन के ,सही राह पाना ,
उस पर चलते जाना ,ही है ,''कड़ी तपस्या''।
कंदराओं और हिमाचल में रहना ही नहीं ,
इक सच्चा जीवन जीना भी है ,''कड़ी तपस्या । ''
